Malcha Mahal-क्यों रहना पड़ा राजकुमार को खंडार में?

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अगर आप कभी दिल्ली के रायसीन हिल्स के पास से गुजरे हो, तो आपने वहाँ पर एक भूतिया सा दिखने वाला Malcha Mahal जरूर देखा होगा| आप में से काफी इसके बारे में जानते होंगे और कुछ नहीं| तो आइये चलते है सीधे Malcha Mahal की तरफ, क्या था? इस महल में ऐसा जो राजकुमार साइरस और राजकुमारी सकीना इतने सालो तक इस खंडहर बन चुके महल में रह रहे थे|

दिल्ली के रायसीन हिल्स इलाके के चाणक्यपुरी में स्थित है Malcha Mahal| यह महल इतना भूतिया और डरावना है, की यहाँ पर लोग जाना तक पसंद नहीं करते| इस महल में चमकदार, छिपकलियों, साँपो और चूहे जैसे जीव जंतुओं का राज बना हुआ है| वैसे तो महल में बहुत सारे खिड़की और दरवाजे जरूर है परन्तु किसी में भी दरवाजे लगे हुए नहीं है| जो इसे और ज़्यादा डरावना बना देती है| काफी लोगो का मानना है की वहाँ किसी के रूह को देखा गया है| तो देखते है की क्या है उस मालचा महल में-

मालचा महल का इतिहास (History of the Malcha Mahal)

महल का निर्माण फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ ने साल 1325 में बनवाया था| जो दिल्ली सल्तनत के शासक थे| जब फ़िरोज़ शाह तुग़लक़ शिकार करने के लिये आया करते थे| तो वे अकसर इसी महल में रुका करते थे| फिर इसके बाद इस पर काफी राजाओं ने शासक किया|

सत्ता से किया था बेदखल(Dismissed from power)

अवध के आखरी नवाब वाजिद अली शाह को अंग्रेजी हुकूमत ने साल 1856 में सत्ता से बेदखल कर दिया गया था, और उनके कोलकाता की जेल में बंदी बना दिया गया था| जिसके बाद नवाब ने अपनी ज़िंदगी के बचे हुए आखरी 26 वर्ष उसी जेल में काटे| जिसके बाद 1882-83 में उनकी मृत्यु हो गयी| जब 1947 में देश आजाद हुआ तो नवाब वाजिद अली शाह के खानदान के सदस्य इधर-उधर बिखर चुके थे| जिसमे से काफी लोग अपने आप को नवाब वाजिद अली शाह के खानदान का सदस्य बता रहे थे| जिसके चलते उस समय के प्रधानमंत्री नेहरू जी ने नवाब के खानदान को कश्मीर में एक घर दे दिया|

begum wilayat in malcha mahal
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बेगम विलायत महल, उनके 12 डोबरमैन कुत्ते और मालचा महल(Begum Wilayat Mahal, their 12 Dobermann dogs and Malcha Mahal)

प्रधानमंत्री के द्वारा दिये घर में 1971 में आग लग गयी| जिसके बाद बेगम विलायत राजकुमार साइरस और राजकुमारी सकीना के साथ लखनऊ आ गयी| उस वक्त इंदिरा गांधी सरकार ने राजाओ को दिये जाने वाले भत्तों पर रोक लगा दी थी| तो बेगम को महल मिलना तो बहुत मुश्किल था| तो बेगम ने पुरे 9 साल दिल्ली रेलवे स्टेशन पर धरना दिया| जब कोई उन्हें हटाने आता तो उनके वो 12 डोबरमैन कुत्ते उस पर झपट जाते और बेगम विलायत महल धमकी देती की वो सांप का जहर पी कर आत्महत्या कर लेंगी| अवध के प्रिंस अली रजा उर्फ साइरस ने कहा था की हम request नहीं करते हम मांग करते है|

महल(Malcha Mahal) तो मिला पर तब तक देर हो चुकी थी

करीब 700 साल पहले बने इस महल को इंदिरा गांधी के कहने पर बेगम को सौंप दिया गया| इस महल में न तो बिजली थी, न पानी था, फिर भी बेगम राजकुमारी और राजकुमार के साथ इस महल में रह रही थी| 10 सितम्बर 1993 को बेगम विलायत ने जहर पी कर आत्महत्या कर ली थी और उनकी बॉडी करीब 10 दिन तक वही उनकी स्टडी डेस्क पर पड़ी रही| जिसको राजकुमार ने महल में ही दफना दिया|

24 जून 1994 में घर के अंदर कुछ लोग खजाने के लालच में घुस आये| जिनके डर से राजकुमार ने बेगम विलायत की लाश को कब्र से निकाल कर आग लगा दी और राख को वही एक बर्तन में भर दिया| इस घटना को ध्यान में रखते हुए दिल्ली गवर्नर ने उनको एक बन्दुक देने का फैसला लिया जिससे वे अपनी हिफाजत कर सके| बेगम विलायत महल की मौत के बाद राजकुमारी सकीना केवल काले कपडे पहनती थी|

सकीना ने 1998 में दिये एक इंटरव्यू में कहा था- ”ये क्रूर प्रकृति हमारी बर्बादी में खुश होती है| इसलिए मुझे किसी चीज की इच्छा नहीं होती| मुझे कुछ नहीं चाहिए| हम जिंदा लाशों के खानदान बन गए हैं”|

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राजकुमार साइरस का अंत

वैसे तो राजकुमार बाहरी दुनिया से ज़्यादा ताल्लुक नहीं रखते थे| पर कभी कभार अर्थ सेंटर के गार्ड से बात कर लिया करते थे| जब गार्ड को ने काफी दिनों तक साइरस को नहीं देखा तो गॉर्ड ने पुलिस को खबर कर दी| 2 नवंबर 2017 को पुलिस Malcha Mahal पहुंची तो राजकुमार साइरस की मौत हो चुकी थी| पुलिस का ऐसा मानना था की उनकी मौत करीब एक महीने पहले हुई थी|

क्या बचा था राजकुमार राजकुमारी के पास?

दोनों बहन-भाई बहार के लोगो से ज़्यादा घुलते मिलते नहीं थे| वो केवल ज़रुरत पड़ने पर ही महल से निकला करते थे मुँह पर कपडा बांध कर,जैसे खाने पीने का सामन लेने| राजकुमार साइरस के पास एक साइकिल थी जिस पर ही वो बहार निकला करते थे| उनका गुजारा साही खजाने से चल रहा था| उन लोगो के पास 28 कुत्ते थे जिनको आस पास के लोगो ने जहर दे कर मार दिया और उनके खजाने के सोने चांदी को भी चुरा लिया था| उन लोगो के पास केवल नेताओ के जूठे वादे थे जो उनसे किये गये थे|

दोनों भाई-बहन काफी पढ़े लिखे थे| यहाँ तक की सकीना ने तो अपनी माँ पर उस खंडर(Malcha Mahal) में रह कर ही एक किताब लिखी थी| ”प्रिंसेस विलायत महल : अनसीन प्रेजंस” जो की नीदरलैंड्स, फ्रांस और ब्रिटेन की लाइब्रेरियों में रखी गयी है पर अपने देश की किसी भी लाइब्रेरी में नहीं| इनके पास एक पुरानी तोप भी थी जिसे काफी लोग खरीदना चाहते थे पर इन्होने माना कर दिया था|

यूएस टुडे में दिये एक इंटरव्यू में सकीना ने कहा था की- वो बर्बाद तो हो चुके है पर उनका गर्व कभी ख़त्म नहीं होगा| सकीना की सोच पर गरीबी ने असर नहीं डाला था वो अब भी राजकुमारी जैसा सोच रही थी|

जब एक बार भारतीय पुरातत्व के एक अधिकारी उनसे मिलने उनके महल गये, तो उनके ऊपर एक सांप गिर गया| जिसके बाद उस अधिकारी ने कहा था की वो अब कभी इस महल में नहीं जायेंगे| उनका कहना था की वो महल इतना भूतिया लग रहा था की किसी के प्राण भी निकल जाये|

पाकिस्तान की रहने वाली थी बेगम विलायत महल

हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स के एक पत्रकार ने बताया था की बेगम विलायत और अवध के आखरी नवाब वाजिद अली शाह कुछ लेना देना नहीं था| जब 1947 भारत आजाद हुआ तो वह पाकिस्तान से भारत आ गए थे| यह दावा करने वाले पत्रकार राजकुमार और राजकुमारी की मौत से पहले उनसे मिल चुके थे|

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